Posted by: Bagewafa | ستمبر 27, 2014

तेरे नक्श को धोया नहीं….. मुनीर नियाज़ी تیرے نقش کو دھویا نہیں۔۔۔۔مُنیر نیازی

तेरे नक्श को धोया नहीं….. मुनीर नियाज़ी

गम की बारिश ने भी तेरे नक्श को धोया नहीं
तूने मुझको खो दिया, मैंने तुझे खोया नहीं

नींद का हल्का गुलाबी सा खुमार आंखों में था
यूँ लगा जैसे वो शब को देर तक सोया नहीं

हर तरफ़ दीवार-ओ-दर और उनमें आँखों का हुजूम
कह सके जो दिल की हालत वो लबे-गोया नहीं

जुर्म आदम ने किया और नस्ले-आदम को सजा
काटा हूँ जिंदगी भर मैंने जो बोया नहीं

जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी ‘मुनीर’
गम से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं

 

تیرے نقش کو دھویا نہیں۔۔۔۔مُنیر نیازی

 

غم کی بارش نے بھی تیرے نقش کو دھویا نہیں
تُو نے مجھ کو کھو دیا، میں نے تجھے کھویا نہیں

نیند کا ہلکا گلابی سا خمار آنکھوں میں تھا

یوں لگا جیسے وہ شب کو دیر تک سویا نہیں

ہر طرف دیوار و دَر اور ان میں آنکھوں کے ہجوم
کہہ سکے جو دل کی حالت وہ لبِ گویا نہیں

جُرم آدم نے کیا اور نسلِ آدم کو سزا
کاٹتا ہوں زندگی بھر میں نے جو بویا نہیں

جانتا ہوں ایک ایسے شخص کو میں بھی منیر
غم سے پتھّر ہو گیا، لیکن کبھی رویا نہیں

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زمرے

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