Posted by: Bagewafa | اکتوبر 11, 2014

کیا بھروسہ ہے……—وسیم ملک ، صورت क्या भरोसा है……—वसीम मलिक , सूरत

क्या भरोसा है……—वसीम मलिक , सूरत

वफाओं के सफर में अजनबी का ,क्या भरोसा है
जिसे परखा नहीं उस आदमी का,क्या भरोसा है

इमारत खोखली बुनियाद पर कायम नहीं रहती
न हो इख्लास तो फिर दोस्ती का,क्या भरोसा है

दिलों से रंजिशों को दूर कर लें,आ गले मिल लें
कहाँ थम जाए सांसें जिन्दगी का,क्या भरोसा है

किसी को बांट दे दौलत किसी से छीन ले दुनिया
अमीर-ए-शहर की दरिया दिली का,क्या भरोसा है

‘वसीम’ उस बेवफा के प्यार पे मग़रूर मत होना
न जाने कब बदल जाए खुशी का, क्या भरोसा है

 

کیا بھروسہ ہے……—وسیم ملک ، صورت

 

وفاؤں کے سفر میں اجنبی کا ،کیا بھروسہ ہے
جسے پرکھا نہیں اس آدمی کا،کیا بھروسہ ہے

عمارت کھوکھلی بنیاد پر قائم نہیں رہتی
نہ ہو اخلاص تو پھر دوستی کا،کیا بھروسہ ہے

دلوں سے رنجشوں کو دور کر لیں،آ گلے مل لیں
کہاں تھم جائے سانسیں زندگی کا،کیا بھروسہ ہے

کسی کو بانٹ دے دولت کسی سے چھین لے دنیا
امیر شہر کی دریا دلی کا،کیا بھروسہ ہے

‘وسیم’ اس بےوفا کے پیار پہ مغرور مت ہونا
نہ جانے کب بدل جائے خوشی کا، کیا بھروسہ ہے

(Courtesy:Facebook..Janab Waseem Malik.Surat)

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