Posted by: Bagewafa | اکتوبر 13, 2014

आज बाज़ार में पाबजोलां चलो(नज़म)….. फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ آج بازار میں پابجولاں چلو (نظم)…. فیض احمد فیض

آج بازار میں پابجولاں چلو (نظم)…. فیض احمد فیض

چشمِ نم، جانِ شوریدہ کافی نہیں

تہمتِ عشق پوشیدہ کافی نہیں
آج بازار میں پا بہ جولاں چلو

دست اَفشاں چلو، مست و رقصاں چلو
خاک برسر چلو، خوں بہ داماں چلو
راہ تَکتا ہے سب شہرِ جاناں چلو

حاکمِ شہر بھی، مجمعِ عام بھی
تیرِ الزام بھی، سنگِ دشنام بھی
صبحِ ناشاد بھی، روزِ ناکام بھی

ان کا دم ساز اپنے سوا کون ہے؟
شہرِ جاناں میں اب باصفا کون ہے؟
دستِ قاتل کے شایاں رہا کون ہے؟

رختِ دل باندھ لو دل فگارو چلو
پھر ہمیں قتل ہو آئیں یارو چلو

आज बाज़ार में पाबजोलां चलो(नज़म)….. फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

 

चश्म-ए-नम, जान-ए-शोरीदा काफ़ी नहीं
तोहमत-ए-इशक़ पोशीदा काफ़ी नहीं
आज बाज़ार में पाबजोलां चलो

दस्त अफ़्शां चलो, मस्त-ओ-रक़्सां चलो
ख़ाक बरसर चलो, ख़ूँ बह दामां चलो
राह तकता है सब शहर-ए-जानां चलो

हाकिम-ए-शहर भी, मजमए आम भी
तीर-ए-इल्ज़ाम भी, संग-ए-दुश्नाम भी
सुबह-ए-नाशाद भी, रोज़ नाकाम भी

इन का दमसाज़ अपने सिवा कौन है?
शहर-ए-जानां में अब बासफ़ा कौन है?
दस्त-ए-क़ातिल के शायां रहा कौन है?

रख़्त-ए-दिल बांध लो दिल फिगारो चलो
फिर हमें क़तल हो आएं यारो चलो

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زمرے

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