Posted by: Bagewafa | نومبر 4, 2014

आवाज-ए-आदम………साहिर लुध्यान्वी

<

आवाज-ए-आदम………साहिर लुध्यान्वी

>

दबेगी कब तलक आवाजे-आदम हम भी देखेंगे
रुकेंगे कब तलक जज्बाते-बरहम हम भी देखेंगे
चलो यूं भी सही ये जौरे-पैहम हम भी देखेंगे

दरे जिंदां से देखें या उरूजे-दार से देखें
तुम्हें रुस्वा सरे-बाजारे-आलम हम भी देखेंगे
जरा दम लो मआले-शौकते-जम हम भी देखेंगे

ये जोमे-कूवते-फौलादो-आहन देख लो तुम भी
ब-फैजे-जज्बा-ए-ईमान-मोहकम हम भी देखेंगे
जबीने-कज कुलाही खाक पर खम हम भी देखेंगे

मुकाफाते-अमल तारीखे-इंसां की रवायत है
करोगे कब तलक नावक फराहम हम भी देखेंगे
कहां तक है तुम्हारे जुल्म में दम हम भी देखेंगे

ये हंगामे-विदा-ए-शब है ऐ जुल्मत के फरजंदों
सहर के दोश पर गुलनार परचम हम भी देखेंगे
तुम्हें भी देखना होगा ये आलम हम भी देखेंगे

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: