Posted by: Bagewafa | جنوری 1, 2015

आंसू बहाता है…….मुहम्मदअली वफा آنسو بہاتا ہے۔۔۔۔۔۔۔محمدعلی وفا

आंसू बहाता है…….मुहम्मदअली वफा

मयकदे से अजीबो गरीब नाता है.
नशा बढता नहीं, के उतर जाता है

कभी आबाद गुलिस्तां दिल का होता था
न आते वो, न कोई गुजर जाता है

सफर में कारवाने गम मुसलसल था
फिर उसी मोड पर ही वकत लाता है

निकलते हैं अश्क दो आंखजो रोदे
बहे दरिया, गर संग आंसू बहाता है.

रहा कुछ रब्त एसा उनकी महेफिलसे
वफा कोई न अब दिल में समाता है

 

آنسو بہاتا ہے۔۔۔۔۔۔۔محمدعلی وفا

 

میکدے سے عجیب و غریب ناطہ ہے۔
نشہ بڑھتا نہیں، کے اتر جاتا ہے

کبھی آباد گلستاں دل کا ہوتا تھا
نہ آتے وہ، نہ کوئی گزر جاتا ہے

سفر میں کاروان غم مسلسل تھا
پھر اسی موڑ پر ہی وقت لاتا ہے

نکلتے ہیں اشک کچھ آنکھ جو رو دے
بہے دریا، گر سنگ آنسو بہاتا ہے۔

رہا کچھ ربط ایسا انکی محفل سے
وفا کوئی نہ اب دل میں سماتا ہے

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