Posted by: Bagewafa | جنوری 8, 2015

अब में राशन की क़तारों में नज़र आता हूँ—–खलील धनतेजवीاب میں راشن کی قطاروں میں نظر آتا ہوں—-خلیل دھنتیجوی

اب میں راشن کی قطاروں میں نظر آتا ہوں—-خلیل دھنتیجوی

اب میں راشن کی قطاروں میں نظر آتا ہوں

اپنے کھیتوں سے بچھڑنے کی سزا پاتا ہوں
اتنی مہنگائی کۂ بازار سے کچھ لاتا ہوں
اپنے بچوں میں اسے بانٹ کر شرماتا ہوں
اپنی نیندوں کا لهو پوچھنے کی کوشش میں
جاگتے جاگتے تھک جاتا هوں، سو جاتا ہوں
کوئی چادر سمجھ کے کھینچ نہ لے پھر سے خلیل
میں کفن اوڑھ کے فٹ پاتھ پۂ سو جاتا ہوں

अब में राशन की क़तारों में नज़र आता हूँ—–खलील धनतेजवी

अब में राशन की क़तारों में नज़र आता हूँ
अपने खेतों से बिछड़ने की सज़ा पाता हूँ
इतनी महंगाई का-ए-बाज़ार से कुछ लाता हूँ
अपने बच्चों में उसे बांट कर शर्माता हूँ
अपनी नींदों का लीओ पूछने की कोशिश में
जागते जागते थक जाता ेओं, सौ जाता हूँ
कोई चादर समझ के खींच ना ले फिर से ख़लील
में कफ़न ओढ़ के फुटपाथ पा-ए-सौ जाता हूँ

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