Posted by: Bagewafa | جنوری 15, 2015

रंग लाके रहेगी.—–मुहम्मदली वफा

रंग लाके रहेगी.—–मुहम्मदली वफा

 तेजो तुंद ये   हवा, रंग लाके रहेगी,
मझ्लूमोंकी बद दुआ ,रंग लाके रहेगी

तु चाहे उंचे फलक्बोस मकांनो में रहे
झुग्गीसे गरीबोंकी सदा, रंग लाके रहेगी.

ये बाग सारे झूल्मके बने हमारे खुनसे,
आ रही है अब खिंजा, रहे रंग लाके रहेगी.

फैले हैं अमराज सब नफरत अदावत से
अब महोब्बतकी ये दवा , रंग लाके रहेगी.

विरान मसाजिद देखा कर,डर नहीं लगता?
मुजाहिदकी अब ये अजां, रंग लाके रहेगी.

नफरतकी दीवारें चुननेमें लगे तुम.
एक दिन हमारी वफा, रंग लाके रहेगी.

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