Posted by: Bagewafa | جون 29, 2015

सियासत नहीं की है –वसीम मलिक , सूरत

सियासत नहीं की है –वसीम मलिक , सूरत

रिश्तों के तक़द्दुस की तिजारत नहीं की है
हमने कभी चाहत में सियासत नहीं की है

हमसे यो इसी बात पे नाराज़ हैं कुछ लोग
हमने कभी झूठों की हिमायत नहीं की है

वो फूल की अज़मत को भला खाक समझता
जिसने कभी बच्चों से मुहब्बत नहीं की है

जिस घर में बुजुर्गों को उठानी पडे ज़िल्लत
उस घर पे खुदा ने कभी रहमत नहीं की है

जो बात हक़ीक़त थी कही सामने उसके
हमने तो किसी शख्स की ग़ीबत नहीं की है

उन लोगों ने खुद अपनी ज़बां काट के रख दी
जिन लोगों ने हक़गोई की हिम्मत नहीं की है

हम इश्क़ का दस्तूर समझते हैं हमेशा
ये सोच के इसमें कोई बीदात नहीं की है

इक पल में ये माहौल बदल सकता है लेकिन
हम लोगों ने खुल कर कभी हिम्मत नहीं की है

बेजा है वसीम अपनों की हमसे ये शिकायत
हमने कभी दुश्मन से भी नफ़रत नहीं की है

(courtesy:Facebook)


زمرے

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