Posted by: Bagewafa | ستمبر 23, 2015

केवल मनुस्मृति….भंवर मेघवंशी

केवल मनुस्मृति -भँवर मेघवंशी

‘केवल मनुस्मृति को ही जला कर,
रुक क्यों गए बाबा साहब?
क्यों नहीं जला डाले
वे सब मनु, जो बसे हैं
कथित उच्चों के मनों में ’
(एकलव्य की गुरु भक्ति पर)
‘एकलव्य क्यों दिया तूने
दक्षिणा में अपना अँगूठा,
क्यों नहीं काटा
द्रोणाचार्य का सिर
ताकि और किसी एकलव्य का
अँगूठा माँगने आता ही नहीं,
फिर कोई द्रोण
और पैदा ही नहीं होते
फिर कोई भी द्रोणवादी लोग‘
(राम शबरी प्रसंग पर )
‘राजा रामचंद्र तुमने
उस आदिवासिन शबरी के पास
जूठे बेर भी नहीं छोड़े
इस तरह निभा ही लिया
तुमने भी हमसे सच्चा बैर‘

लोकसंघर्ष पत्रिका -सितम्बर अंक में प्रकाशित

 

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