Posted by: Bagewafa | ستمبر 29, 2015

तु अगर मेरा नहीं बनता ना बन, अपना तो बन…. अल्लामा मुहम्मद इक़बालتو اگر میرا نہیں بنتا نہ بن، اپنا تو بن۔۔۔ علامہ محمد اِقبال

تو اگر میرا نہیں بنتا نہ بن، اپنا تو بن۔۔۔ علامہ محمد اِقبال

پھر چراغِ لالہ سے روشن ہوئے کوہ و ومن
مجھ کو پھر نغموں پہ اکسانے لگا مرغِ چمن

پھول ہیں صحرا میں یا پریاں قطار اندر قطار
اُودے اُودے، نیلے نیلے، پیلے پیلے پیرہن

برگ گل پر رکھ گئی شبنم کا موتی باد صبح
اور چمکاتی ہے اس موتی کو سورج کی کرن!

حسنِ بے پروا کو اپنی بے نقابی کے لئے
ہوں اگر شہروں سے بن پیارے تو شہر اچھے کہ بن؟

اپنے من میں ڈوب کر پاجا سراغِ زندگی
تو اگر میرا نہیں بنتا نہ بن، اپنا تو بن

من کی دنیا؟ من کی دنیا سوز و مستی جذب و شوق
تن کی دنیا؟ تن کی دنیا سودو سودا مکرو فن

من کی دولت ہاتھ آتی ہے تو پھر جاتی نہیں
تن کی دولت چھاﺅں ہے! آتا ہے دھن، جاتا ہے دھن

من کی دنیا میں نہ پایا میں نے افرنگی کا راج
من کی دنیا میں نہ دیکھے میں نے شیخ و برہمن

پانی پانی کر گئی مجھ کو قلندر کی یہ بات
تو جھکا جب غیر کے آگے نہ من تیرا، نہ تن

तु अगर मेरा नहीं बनता ना बन, अपना तो बन…. अल्लामा मुहम्मद इक़बाल

फिर चिराग़-ए-लाला से रोशन हुए कोह-ओ-व मन
मुझको फिर नग़मों पे उकसाने लगा मुर्ग-ए-चमन
फूल हैं सहरा में या परियाँ क़तार अन्दर क़तार
ऊदे ऊदे, नीले नीले, पीले पीले पैरहन-
बर्ग गुल पर रख गई शबनम का मोती बाद-ए-सुब्ह
और चमकाती है इस मोती को सूरज की किरण!
हुस्न-ए-बे पर्वा को अपनी बे-नक़ाबी के लिए
हूँ अगर शहरों से बन प्यारे तो शहर अच्छे के बन?
अपने मन में डूब कर पा जा सुराग-ए-ज़िंदगी
तु अगर मेरा नहीं बनता ना बन, अपना तो बन
मन की दुनिया? मन की दुनिया सोज़-ओ-मस्ती जज़ब-ओ-शौक़
तन की दुनिया? तन की दुनिया सूदो सौदा मकरो फ़न
मन की दौलत हाथ आती है तो फिर जाती नहीं
तन की दौलत छाऊं है! आता है धन, जाता है धन
मन की दुनिया में ना पाया मैंने अफ़रंगी का राज
मन की दुनिया में ना देखे मैंने शेख़-ओ-ब्रहमन
पानी पानी कर गई मुझको क़लंदर की ये बात
तो झुका जब ग़ैर के आगे ना मन तेरा, ना तन

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