Posted by: Bagewafa | اکتوبر 1, 2015

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है…हजरत मौलाना हसरत मोहानी साहब

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है…हजरत मौलाना हसरत मोहानी साहब

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

तुझसे मिलते ही वो कुछ बेबाक हो जाना मेरा
और तेरा दाँतों में वो उँगली दबाना याद है

चोरी चोरी हमसे तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है

दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिये
वो तेरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है

खैंच लेना वो मेरा पर्दे का कोना दफ़तन
और दुपट्टे से तेरा वो मुँह छुपाना याद है

तुझको जब तन्हा कभी पाना तो अज़\-राह\-ए\-लिहाज़
हाल\-ए\-दिल बातों ही बातों में जताना याद है

आ गया गर वस्ल की शब भी कहीं ज़िक्र\-ए\-फ़िराक़
वो तेरा रो रो के भी मुझको रुलाना याद है

वाँ हज़ाराँ इज़्तिराब, याँ सद\-हज़ाराँ इश्तियाक
तुझको वो पहले\-पहल दिल का लगाना याद है

जान कर होना तुझे वो कसद\-ए\-पा\-बोसी मेरा
और तेरा ठुकरा के सर वो मुस्कुराना याद है

जब सिवा मेरे तुम्हारा कोई दीवाना न था
सच कहो कुछ तुमको अब भी वो ज़माना याद है

ग़ैर की नज़रों से बच कर सबकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़
वो तेरा चोरी छिपे रातों को आना याद है

देखना मुझको जो बरगश्ता सौ नाज़ से
जब मना लेना तो फिर खुद रूठ जाना याद है

शौक़ में मेहंदी के वो बे\-दस्त\-ओ\-पा होना तेरा
और मेरा वो छेड़ना वो गुदगुदाना याद है

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Responses

  1. हुस्न दिलकशी व जज्बात के साहिर जिन की साहिरी में ..बड़ी बड़ी हस्तियाँ खो गई .. एक ऐसा शेर जिस ने आसन ज़बान में मुश्किल ख़यालात को यकजा कर दिया ! बहुत ही अच्छी कविता है इस इन्तेक्हब के लिए मुबारकबाद कुबूल कीजिये .
    साहिर से मुताल्लिक एक दिलचस्प मज़मून यहाँ भी देखा जा सकता है
    http://www.nuqoosh.in/urdu-literature-in-hindi/sahir-ludhiyanwi-life-rashid-ashraf/

  2. माअस्सलम! साहिर लुध्यान्वी साहब मर्हूमकी लींक अता करनेके लिये बहुत बहुत शुक्रियह.साहिर वाकए साहिर थे.उनकी नजम,गझल,गीत,गाने..कोई भी शे लेलो..बस सहर ही सहर है.मगर हजरत ये गझल जो यहां पोस्ट हुई है वो हजरत मौलाना हसरत मोहानी साहबकी है.जंगे आझादीकी अव्वल सफके सिपाही हे.मुकम्मिल आझादी और इंकिलाब झिंदाबाद का नारा उन्होने दियाथा.ये गझल हसरत मोहानी साहब पर बनी हुई डोकयुमेंट्री में भी गाई गयी है..बहर हाल ब्लोग पर तशरीफ आवरी प्र बहुत ममनुअ हुं…मुहम्मदअली वफा(www.bagewafa.wordpress.com)


زمرے

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