Posted by: Bagewafa | جنوری 2, 2016

ऐ नये साल बता, तुझ में नयापन क्या है……..फैज अहमद फैज़

ऐ नये साल बता, तुझ में नयापन क्या है……..फैज अहमद फैज़

ऐ नये साल बता, तुझ में नयापन क्या है
हर तरफ ख़ल्क ने क्यों शोर मचा रखा है

रौशनी दिन की वही, तारों भरी रात वही
आज हमको नज़र आती है हर बात वही

आसमां बदला है अफसोस, ना बदली है जमीं
एक हिन्दसे का बढ़ना कोई जिद्दत तो नहीं

अगले बरसों की तरह होंगे करीने तेरे
किसे मालूम नहीं बारह महीने तेरे

जनवरी, फरवरी और मार्च में पड़ेगी सर्दी
और अप्रैल, मई, जून में होवेगी गर्मी

तेरे मान-दहार में कुछ खोएगा कुछ पाएगा
अपनी मय्यत बसर करके चला जाएगा

तू नया है तो दिखा सुबह नयी, शाम नई
वरना इन आंखों ने देखे हैं नए साल कई

बेसबब देते हैं क्यों लोग मुबारक बादें
गालिबन भूल गए वक्त की कडवी यादें

तेरी आमद से घटी उमर जहां में सभी की
फैज नयी लिखी है यह नज्म निराले ढब की

हिन्दसे=अंक,नंबर

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