Posted by: Bagewafa | جنوری 17, 2016

नज़रों से अब ये बोझ उठाया न जायेगा।……शकील क़ादरी نظروں سے اب یہ بوجھ اٹھایا نہ جائیگا۔۔۔۔۔۔ شکیل قادری

नज़रों से अब ये बोझ उठाया न जायेगा।……शकील क़ादरी

तरही ग़ज़ल

ज़िक़्रे फ़रेबे यार सुनाया न जायेगा।
अब दर्दे दिल ज़बान पे लाया न जायेगा।

मजबूर मैं भी हूँ कि बुलाया न जायेगा।
सच ये भी है कि आप से आया न जायेगा।

मंज़र हर एक राह का लगता है ख़ूँचकाँ
नज़रों से अब ये बोझ उठाया न जायेगा।

माँ ने पिलाया दूध वो इक ऐसा क़र्ज़ है
मरने के बाद भी जो चुकाया न जायेगा।

ये कायनात यक़ता मुसव्विर का नक़्श है
जो मासिवा किसी से मिटाया न जायेगा।

ख़ुद अपने क़त्ल के लिये मैं ने सजा लिया
मक़्तल किसी से ऐसे सजाया न जायेगा।

जिस रोज़ मेरे दस्ते अक़ीदत ने आप का
"दामन पकड़ लिया तो छुड़ाया न जायेगा।”

ग़ालिब का हो ख़याल कि फिर मीर का बयाँ
दिल में जो बस गया तो भुलाया न जायेगा।

नज़रें मिला के उस ने अजब वा’दा ले लिया
जो हम से जिंदगी में निभाया न जायेगा।

जो मिल रहा है ज़हन को फ़ानूसे क़ल्ब से
नूर ऐसा इन चराग़ों से पाया न जायेगा।

है अक़्स चश्मे शब में भी चहरे का आप के
जिस को बुरी नज़र से बचाया न जायेगा।

ताउम्र हम को देना ख़ुदा लुक़्म ए हलाल
रिज़्के हराम होगा तो खाया न जायेगा।

क़ुर्बान कर दे जान मैं ऐसा फ़क़ीर हूँ
बैठा जो तेरे दर पे, उठाया न जायेगा।

मौमिन हूँ सच्चा इस लिये सर बेगुनाह का
हाथों से अपने काट के लाया न जायेगा।

आगे न तुझ से कोई निकल पाएगा "शकील”
जब तक ज़मीं पे तुझ को गिराया न जायेगा।

نظروں سے اب یہ بوجھ اٹھایا نہ جائیگا۔۔۔۔۔۔ شکیل قادری

ذکرے فریب یار سنایا نہ جائیگا۔
اب دردے دل زبان پہ لایا نہ جائیگا۔

مجبور میں بھی ہوں که بلایا نہ جائیگا۔
سچ یہ بھی ہے که آپ سے آیا نہ جائیگا۔

منظر ہر ایک راہ کا لگتا ہے خوں چکاں
نظروں سے اب یہ بوجھ اٹھایا نہ جائیگا۔

ماں نے پلایا دودھ وہ اک ایسا قرض ہے
مرنے کے بعد بھی جو چکایا نہ جائیگا۔

یہ قائنات یکتا مصور کا نقش ہے
جو ماسوا کسی سے مٹایا نہ جائیگا۔

خود اپنے قتل کے لئے میں نے سجا لیا
مقتل کسی سے ایسے سجایا نہ جائیگا۔

جس روز میرے دستے عقیدت نے آپ کا
“دامن پکڑ لیا تو چھڑایا نہ جائیگا۔”

غالب کا ہو خیال که پھر میر کا بیاں
دل میں جو بس گیا تو بھلایا نہ جائیگا۔

نظریں ملا کے اس نے عجب وعدہ لے لیا
جو ہم سے زندگی میں نبھایا نہ جائیگا۔

جو مل رہا ہے ذہن کو فانوس قلب سے
نور ایسا ان چراغوں سے پایا نہ جائیگا۔

ہے عکس چشمے شب میں بھی چہرے کا آپ کے
جس کو بری نظر سے بچایا نہ جائیگا۔

تاؤمر ہم کو دینا خدا لقم اے حلال
رز کے حرام ہوگا تو کھایا نہ جائیگا۔

قربان کر دے جان میں ایسا فقیر ہوں
بیٹھا جو تیرے در پہ، اٹھایا نہ جائیگا۔

مومن ہوں سچا اس لئے سر بےگناہ کا
ہاتھوں سے اپنے کاٹ کے لایا نہ جائیگا۔

آگے نہ تجھ سے کوئی نکل پائیگا “شکیل”
جب تک زمیں پہ تجھ کو گرایا نہ جائیگا۔

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: