Posted by: Bagewafa | جنوری 21, 2016

किसी नजर को तेरा इंतेजार आज भी है।….फारुक कैसरکسی نظر کو تیرا انتظار آج بھی ہے…..فاورق قیصر

 

کسی نظر کو تیرا انتظار آج بھی ہے…..فاورق قیصر

 

کسی نظر کو تیرا انتظار آج بھی ہے
کہاں ہو تم کے یہ دل بےقرار آج بھی ہے

 

وہ وادیاں وہ فضائیں کہ ہم ملے تھے جہاں

میری وفا کا وہیں پر مزار آج بھی ہے

نا جانے دیکھ کے کیوں اُنکو یہ ہو احساس

کہ میرے دل پہ اُنہیں اختیار آج بھی ہے

وہ پیار جس کے لیؑے ہم نے چھوڑ دی دنیا

وفا کی راہ میں گھائل وہ پیار آج بھی ہے

یقیں نہیں ہے مگر آج بھی یہ لگتا ہے

میری تلاش میں شائد بہار آج بھی ہے

نا پوچھ کتنے محبت کے ذخم کھائے ہیں

کہ جن کو سوچ کے دل سوگوار آج بھی ہے

کسی نظر کو تیرا انتظار آج بھی ہے

کہاں ہو تم کہ یہ دل بےقرار آج بھی ہے

किसी नजर को तेरा इंतेजार आज भी है।….फारुक कैसर

किसी नजर को तेरा इंतेजार आज भी है,

कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है,

वो वादियाँ, वो फिजाएं के हम मिले थे जहाँ,

मेरे वफा का वहीं पर मजार आज भी है,

न जाने देख के क्यों उनके ये हुआ अहसास,

के मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है,

वो प्यार जिस के लिए हमने छोड़ दी दुनियां,

वफा की राह में घायल वो प्यार आज भी है,

यकीं नहीं हैं मगर आज भी ये लगता है,

मेरी तलाश में शायद बहार आज भी है।

न पूछ कितने मुहब्बत के जख्म खाएँ हैं,

के जिनको सोचके दिल सोगवार आज भी है,

वो प्यार जिस के लिए हमने छोड़ दी दुनियां,

वफा की राह में घायल वो प्यार आज भी है,

किसी नजर को तेरा इंतेजार आज भी है,

कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है,

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