Posted by: Bagewafa | مارچ 12, 2016

यह मत भूलो अगली नस्लें रौशन शोला होती हैं۔—गौहर रजा یہ مت بھولو اگلی نسلیں روشن شولہ ہوتی ہے۔۔۔۔۔گوہر رضا

यह मत भूलो अगली नस्लें जलता रौशन शोला होती हैं۔—गौहर रजा

 

धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या क्या स्वांग रचाएगी

मसली कलियाँ, झुलसा गुलशन, ज़र्द ख़िज़ाँ दिखलाएगी

यूरोप जिस वहशत से अब भी सहमा सहमा रहता है

खतरा है वह वहशत मेरे मुल्क में आग लगायेगी

जर्मन गैसकदों से अबतक खून की बदबू आती है

अंधी वतन परस्ती हम को उस रस्ते ले जायेगी

अंधे कुएं में झूट की नाव तेज़ चली थी मान लिया

लेकिन बाहर रौशन दुनियां तुम से सच बुलवायेगी

नफ़रत में जो पले बढे हैं, नफ़रत में जो खेले हैं

नफ़रत देखो आगे आगे उनसे क्या करवायेगी

फनकारो से पूछ रहे हो क्यों लौटाए हैं सम्मान

पूछो, कितने चुप बैठे हैं, शर्म उन्हें कब आयेगी

यह मत खाओ, वह मत पहनो, इश्क़ तो बिलकुल करना मत

देश द्रोह की छाप तुम्हारे ऊपर भी लग जायेगी

यह मत भूलो अगली नस्लें जल्ता रौशन शोला होती हैं

आग कुरेदोगे, चिंगारी दामन तक तो आएगी

 

یہ مت بھولو اگلی نسلیں جلتاروشن شولہ ہوتی ہے۔۔۔۔۔گوہر رضا

 دھرم میں لِپٹی وطن پرستی کیا کیا سواںگ رچااےگی

مسلی کلیاں، جھُلسا گُلشن، ذر د  خِزاں دِکھلاّیگی

یُوروپ جِس وہشت سے اَب بھی سہما سہما رہتا ہے

خطرہ ہے وہ وہشت میرے مُلک میں آگ لگائےگی

جرمن گیسکدوں سے اب تک خون کی بدبُو آتی ہے

اَںدھی وطن پرستی ہم کو اُس رستے لے جائیگی

اَںدھے کوئیں میں جھُوٹ کی ناو تیز چلی تھی مان لیا

لیکِن باہر روشن دُنِیاں تُم سے سچ بُلواےےگی

نفرت میں جو پلے بڑے ہیں، نفرت میں جو کھیلے ہیں

نفرت دیکھو آگے آگے اُن سے کیا کروایّگی

فنکاراُ سے پُوچھ رہے ہو کیوں لؤٹائے ہیں سمّان

پُوچھو، کِتنے چُپ بیٹھے ہیں، شرم اُنہیں کب آئیگی

یہ مت کھاؤ، وہ مت پہنو، عشق تو بِل کُل کرنا مت

دیش دروہ کی چھاپ تُمہارے اُوپر بھی لگ جائیگی

یہ مت بھولوُ اَگلی نسلیں  جلتا روشن شولہ ہوتی ہیں

آگ کُریدُگے، چِںگاری دامن تک تو آئیگی


زمرے

%d bloggers like this: