Posted by: Bagewafa | جولائی 5, 2016

मेरा वतन वही है —–अल्लामा इक़बालمیرا وطن وہی ہے۔۔۔۔۔۔۔عللامہ اقبال

میرا وطن وہی ہے۔۔۔۔۔۔۔عللامہ اقبال

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मेरा वतन वही है —–अल्लामा इक़बाल

 

चिश्ती ने जिस ज़मीं पे पैग़ामे हक़ सुनाया,

नानक ने जिस चमन में बदहत का गीत गाया,

तातारियों ने जिसको अपना वतन बनाया,

जिसने हेजाजियों से दश्ते अरब छुड़ाया,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

 

सारे जहाँ को जिसने इल्मो-हुनर दिया था,

यूनानियों को जिसने हैरान कर दिया था,

मिट्टी को जिसकी हक़ ने ज़र का असर दिया था

तुर्कों का जिसने दामन हीरों से भर दिया था,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

 

टूटे थे जो सितारे फ़ारस के आसमां से,

फिर ताब दे के जिसने चमकाए कहकशां से,

बदहत की लय सुनी थी दुनिया ने जिस मकां से,

मीरे-अरब को आई ठण्डी हवा जहाँ से,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

 

बंदे किलीम जिसके, परबत जहाँ के सीना,

नूहे-नबी का ठहरा, आकर जहाँ सफ़ीना,

रफ़अत है जिस ज़मीं को, बामे-फलक़ का ज़ीना,

जन्नत की ज़िन्दगी है, जिसकी फ़िज़ा में जीना,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

 

गौतम का जो वतन है, जापान का हरम है,

ईसा के आशिक़ों को मिस्ले-यरूशलम है,

मदफ़ून जिस ज़मीं में इस्लाम का हरम है,

हर फूल जिस चमन का, फिरदौस है, इरम है,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

 

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