Posted by: Bagewafa | اگست 7, 2016

सबक़ एक कविता…….रवीश कुमार

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सबक़ एक कविता…….रवीश कुमार

सबक़ अब तुम सबक़ नहीं रहे

माँ बाप

गुरु

दोस्त

ज़िंदगी

से हम सीखते रहे सबक़

इम्तहानों के दिनों में जाग जाग कर

रटते रहे सबक़

ठोकरों ने सबक सिखाया

सबक़ ने ठोकरों से बचाया

सिखाने वाले बदल गए हैं

धमकाने वाले आ गए हैं

मंत्री भी सबक सिखलाते हैं

कौन कौन सिखा सकता है

उचक उचक बतलाते हैं

सबक़ का मतलब कॉफ़ी है

सबक़ का मतलब टॉफ़ी है

सबक़ का मतलब धमकी है

साहिबाने हिन्द का ऐसा ही फ़रमान है

सीख लें ख़ुद से वर्ना सीखा देंगे

फौज है गुंडों की

सबके पीछे लगा देंगे

बस बोल कर देखो

बोलती बंद करा देंगे

सबक़ का अब मतलब बदल गया है

गुंडों के आने से बिज़नेस खिसक गया है

रहना है मुल्क में तो याद रखना ये सबक़

सबक़ का नाम देश है

देश का नाम सबक़ है

गुंडों का नाम सबक़ है

सबक़ का नाम गुंडा है

नाम काम सब एक हैं

राम नाम सत्य है

राम नाम सत्य है

(सौजन्य:कस्बा)

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