Posted by: Bagewafa | اکتوبر 20, 2016

ज़हरवाले न हों कोई जगह ऐसी नहीं होती — विनय कुमार زہروالے نہ ہوں کوئی جگہ ایسی نہیں ہوتی ۔۔۔۔۔۔ ونیہ کمار

ज़हरवाले न हों कोई जगह ऐसी नहीं होती — विनय कुमार

 

ज़हरवाले न हों कोई जगह ऐसी नहीं होती।

कहीं जंगल नहीं होता, कहीं बस्ती नहीं होती।

 

छतों के बीच अम्बर छेंकने की जंग छिड़ती है

पहल जब आसमां को छत बनाने की नहीं होती।

 

अमीरी का सफ़र बाहर, फ़कीरी का सफ़र भीतर

किसी लम्बे सफ़र की रहगुज़र सीधी नहीं होती।

 

खुशी खरगो श है, शा तिर हवा है, शेख चिड़िया है

खुशी लंगड़ी भिखारिन सी कहीं बैठी नहीं होती।

 

नयी मिट्टी, नया पानी, मछलियों के नये कुनबे

नदी बासी नहीं होती, नदी बूढ़ी नहीं होती।

 

न तो अम्बर पिघलता है न दरिया खून रोता है

दिलों के डूबने की शाम सतरंगी नहीं होती।

 

न दिल बनते न ज़ाँ बनते, दिलोज़ाँ से न माँ बनते

हमारी गोद में ग़र फूल सी बेटी नहीं होती।

 

अमा तुम चोंचले छोड़ो हमें भी सांस लेने दो

किसी के सांस लेने से हवा जूठी नहीं होती।

زہروالے نہ ہوں کوئی جگہ ایسی نہیں ہوتی ۔۔۔۔۔۔ ونیہ کمار

زہروالے نہ ہوں کوئی جگہ ایسی نہیں ہوتی۔

کہیں جنگل نہیں ہوتا، کہیں بستی نہیں ہوتی۔

چھتوں کے بیچ امبر چھینکنے کی جنگ چھڑتی ہے

پہل جب آسماں کو چھت بنانے کی نہیں ہوتی۔

امیری کا سفر باہر، فقیری کا سفر بھیتر

کسی لمبے سفر کی رہگزر سیدھی نہیں ہوتی۔

خوشی خرگو ش ہے، شا تر ہوا ہے، شیخ چڑیا ہے

خوشی لنگڑی بھکارن سی کہیں بیٹھی نہیں ہوتی۔

نئی مٹی، نیا پانی، مچھلیوں کے نئے کنبے

ندی باسی نہیں ہوتی، ندی بوڑھی نہیں ہوتی۔

نہ تو امبر پگھلتا ہے نہ دریا خون روتا ہے

دلوں کے ڈوبنے کی شام سترنگی نہیں ہوتی۔

نہ دل بنتے نہ جاں بنتی، دلوجاں سے نہ ماں بنتے

ہماری گود میں گر پھول سی بیٹی نہیں ہوتی۔

عما تم چونچلے چھوڑو ہمیں بھی سانس لینے دو

کسی کے سانس لینے سے ہوا جوٹھی نہیں ہوتی۔

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: