Posted by: Bagewafa | نومبر 10, 2016

تو ابھی رہ گزر میں ہے قید مقام سے گزر۔۔۔۔ علامہ اقبال तु अभी रह गुज़र में है क़ैदो मुक़ाम से गुज़र…. अल्लामा इक़बाल

original

تو ابھی رہ گزر میں ہے قید مقام سے گزر۔۔۔۔ علامہ اقبال

 

 

تو ابھی رہ گزر میں ہے قید مقام سے گزر

 

مصر و حجاز سے گزر پارس و شام سے گزر

 

 

جس کا عمل ہے بے غرض اس کی جزا کچھ اور ہے

 

حور و خیام سے گزر بادہ و جام سے گزر

 

 

 

گرچہ ہے دل کشا بہت حسن فرنگ کی بہار

 

طائرک بلند بام دانہ و دام سے گزر

 


کوہ شگاف تیری ضرب تجھ سے کشاد شرق و غرب

 

تیغ ہلال کی طرح عیش نیام سے گزر

 

 

 

تیرا امام بے حضور تیری نماز بے سرور

 

ایسی نماز سے گزر ایسے امام سے گزر

तु अभी रह गुज़र में है क़ैदो मुक़ाम से गुज़र…. अल्लामा इक़बाल

 

 

 

तु अभी रह गुज़र में है क़ैद मुक़ाम से गुज़र

 

मिस्र ओ- हिजाज़ से गुज़र पारस ओ- शाम से गुज़र

 

 

जिस का अमल है बे ग़रज़ इस की जज़ा कुछ और है

 

हूर ओ- ख़य्याम से गुज़र बादह ओ- जाम से गुज़र

 

 

गरचे है दिल कशा बहुत हुस्ने फिरंग की बिहार

 

ताईरकी बुलंद बाम दाना ओ- दाम से गुज़र

 

 

 

कोह शिगाफ़ तेरी ज़रब तुझ से कुशाद शिर्क ओ- ग़र्ब

 

तेग हिलाल की तरह ऐशे नियाम से गुज़र

 

 

 

 

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زمرے

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