Posted by: Bagewafa | نومبر 22, 2016

محمود ،میرے دوست۔۔۔۔محمود درویش महमूद ,मेरे दोस्त…..मेहमूद दर्वीश(फलिस्तीनी अरबी कवि)

محمود ،میرے دوست۔۔۔۔محمود درویش

محمود ،میرے دوست

دکھ ایک ایسا سفید پرندہ ہے

جو میدان جنگ کے قریب بھی نہیں پھٹکتا

فوجی کے لیے دکھ گناہ ہے

وہاں تو میں صرف ایک مشین ہوتا ہوں

جو آگ اگلتی ہے

اور علاقے کو ایک ایسے سیاہ پرندے میں تبدیل کردیتی ہے

جو اڑ نہیں سکتا

(فوجی جو سوسن کے خواب دیکھتا ہے)

اور تم اب ہماری دہلیز پر کھڑے ہو

آؤ ،اندر آجاؤ،ہمارے ساتھ بیٹھو

اور عرب کافی کی چسکیاں لو

[شاید تم بھی محسوس کرنے لگو کہ تم بھی انسان ہو،جیسے ہم ہیں]

(محاصرے کے دوران)

ماں! کیا ہم سے کوئی غلطی ہوگئی ہے

کیوں ضروری ہے کہ ہم دو بار مریں

ایک بار تو مریں زندگی میں

اور ایک بار زندگی کے بعد

بید کے جنگلو!کیا تمھیں

کیا تمھیں یاد رہے گا کہ وہ

جسے دوسری مردہ اشیا کی طرح

تمھارے اداس سایوں میں پھینکا گیا ، ایک آدمی تھا ؟

کیا تمھیں یاد رہے گا کہ میں ایک آدمی ہوں؟

(جلاوطنی سے خط)

معدوم ہوتے لفظوں کے درمیان سے گذرنے والو!

تمھاری اور سے تلوار،ہماری طرف سے خون

تمھاری اور سے فولاد

ہماری طرف سے گوشت

تمھاری طرف سے ایک اور ٹینک

ہماری طرف سے پتھر

تمھاری طرف سے آنسو گیس

ہماری طرف سے وہی آنسو اور بارش

ہم پر بھی اور تم پر بھی آسمان

ہمارے لیے بھی اور تمھارے لیے بھی ہوا

اس لیے لے لو ہمارے خون میں سے اپنا حصہ

اور چلے جاؤ

جاؤ چلے جاؤکسی رقص کی تقریب میں

ہمیں تو ابھی آبیاری کرنی ہے

پھولوں کی ،شہیدوں کی

ہمیں تو ابھی اورزندہ رہنا ہے

جہاں تک بھی ممکن ہوسکے گا

(وہ جو لفظوں کے درمیاں گزرے)

महमूद ,मेरे दोस्त…..मेहमूद दर्वीश(फलिस्तीनी अरबी कवि

 

महमूद ,मेरे दोस्त

दु:ख एक ऐसा सफ़ैद परिंदा है

जो मैदान-ए-जंग के क़रीब भी नहीं फटकता

फ़ौजी के लिए दु:ख गुनाह है

वहां तो मैं सिर्फ एक मशीन होता हूँ

जो आग उगलती है

और इलाक़े को एक ऐसे स्याह परिंदे में तबदील कर देती है

जो उड़ नहीं सकता

(फ़ौजी जो सोसन के ख्वाब देखता है)

और तुम अब हमारी दहलीज़ पर खड़े हो

आओ ,अंदर आ जाओ,हमारे साथ बैठो

और अरब काफ़ी की चुसकीयां लो

[शायद तुम भी महसूस करने लगो कि तुम भी इन्सान हो,जैसे हम हैं]

(मुहासिरे के दौरान)

माँ! क्या हमसे कोई ग़लती हो गई है

क्यों ज़रूरी है कि हम दो बार मरें

एक-बार तो मरें ज़िंदगी में

और एक-बार ज़िंदगी के बाद

बेद के जंगलो!क्या तुम्हें

क्या तुम्हें याद रहेगा कि वो

जिसे दूसरी मुर्दा अश्या की तरह

तुम्हारे उदास सायों में फेंका गया , एक आदमी था ?

क्या तुम्हें याद रहेगा कि में एक आदमी हूँ?

(जिलावतनी से ख़त)

मादूम होते लफ़्ज़ों के दरमयान से गुज़रने वालो!

तुम्हारी और से तलवार,हमारी तरफ़ से ख़ून

तुम्हारी और से फ़ौलाद

हमारी तरफ़ से गोश्त

तुम्हारी तरफ़ से एक और टैंक

हमारी तरफ़ से पत्थर

तुम्हारी तरफ़ से आँसू गैस

हमारी तरफ़ से वही आँसू और बारिश

हम पर भी और तुम पर भी आसमान

हमारे लिए भी और तुम्हारे लिए भी हुआ

इसलिए ले लो हमारे ख़ून में से अपना हिस्सा

और चले जाओ

जाओ चले जाओ किसी रक़्स की तक़रीब में

हमें तो अभी आबयारी करनी है

फूलों की ,शहीदों की

हमें तो अभी और ज़िंदा रहना है

जहां तक भी मुम्किन हो सकेगा

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: