Posted by: Bagewafa | نومبر 29, 2016

कभी भोपाल कर डाला….इमरान प्रतापगढी کبھی بھوپال کر ڈالا۔۔۔عمران پرتاپگڑھی

कभी भोपाल कर डाला….इमरान प्रतापगढी

पुराने  हाल से बदतर सभी  का  हाल  कर डाला

कहीं  कश्मीर कर  डाला…कभी  भोपाल कर  डाला

कहां  वादा  था  हर  खातेमें 15 लाख  आयेंगे

कहां  सब  ले लिया हर शख्सको  कंगाल कर डाला

सियासत आपकी सांसो पे पाबंदी  करा देगी

मगर  नफरतके  मारोंमें  रजामंदी करेगी

ये  जनता  है  रुलाओ मत इसे  तुम खूनके  आंसु

अगर ये  जीद  पे  आयेगी तो  नसबंदी करा देगी

और कीतना सितम  याद  करोगे  साहब

अब  कीतना हमें बरबाद  करोगे  साहब

खुदकी  औलाद  नहीं  है तो बताओ  इतना

कीतनी  मांओको बे  औलाद  करोगे  साह्ब

सरहद  पर  दहशत  गर्दो  का  कब्जा  है

मुल्क् पे  झूटे  हमदर्दो ंका  कब्जा  है

एक के बदले दस  सरोंकी  उम्मीद न रख

दिल्ही तुझ पर  ना मर्दोंका कब्जा  है

सूरज

साहब रोशन  दान की बातें  करता  है.

एक  कश्मीर  संभाले नही संभलता   है

और बलुचिस्तान की  बातें करता है

अपने  सभी  प्यादों  केनाम बदल डालो

तारीखी  यादोंका नाम बदल  डालो

अकबर रोड  के नाम  बदल नेसे पहले

अपने दामादोंका नाम बदल  डालो

*

घुर्राने  वालोंको आग  बबूला करके  छोड  दिया

इधर  उधर बस झूल रहे हैं झूल  करके  छोड  दिया

अमित शाह को  लालु  ने  लूला करके  छोड  दिये

चाय  चाय  करते थे…गाय  गाय  करते  हैं

जगे  हैं  दलित  जबसे  हाय  हाय  करतें  है

तीन  साल  बाकी  है आने  दो  जरा उन्हें

दिल्हीभी  ये कह देगी  बाय  बाय  करते  हैं.

जो नफरत  के  सबब की थी  वो  ललकार कीसकी थी

हमारे खूनको  प्यासी थी वो तलवार  कीसकी थी

हमारी गरदन मत  काटिये बस ये  बता दिजीये

जीसे  तुम  पहनके  भागे थे  ये  सल्वार  कीसकी थी

लहूकी बात  करता है कतलकी बात  करता है

वो  कारोबारिये के साथ धन की बात  करता  है

हमारे  मूल्कने  कैसा   नमुना  चुन  लिया  है  यारो

वतन की  बात  करनी थी  तो  मनकी  बात  करता  है.

……..

हाथोंकी  सफाई  छुपाता  है

वो  काली कमाई छूपाता  है

दावा है मसीहाई   का  मगर

वो अपनी लुगाई  छूपाता  है

मीडिया ने  गढ  रखा  है

वो  जूठी शानका  क्या  होगा

जओ बीवी  का न हुआ  भला

वो हिंदुस्तानका क्या होगा?

………

सुना था कि बेहद सुनहरी है दिल्ली,

समंदर सी ख़ामोश गहरी है दिल्ली !

मगर एक मॉं की सदा सुन ना पाये,

तो लगता है गूँगी है बहरी है दिल्ली !!

वो ऑंखों में अश्कों का दरिया समेटे

, वो उम्मीद का इक नज़रिया समेटे !

यहॉं कह रही है वहॉं कह रही है

तडप करके ये एक मॉं कह रही है !

कोई पूँछता ही नहीं हाल मेरा…..!

कोई ला के दे दे मुझे लाल मेरा…!

उसे ले के वापस चली जाऊँगी मैं,

पलट कर कभी फिर नहीं आऊँगी मैं !

बुढापे का मेरे सहारा वही है,

वो बिछडा तो ज़िन्दा ही मर जाऊँगी मैं !

मेरी चीख़ और मेरी फ़रियाद कहना,

ये मोदी से इक मॉं की रूदाद कहना !

कहीं झूठ की शख़्सियत बह ना जाये,

ये नफ़रत की दीवार छत बह ना जाये !

है इक मॉं के अश्कों का सैलाब साहब,

कहीं आपकी सल्तनत बह ना जाये !!

वो है ज़िन्दगी भर की मेरी कमाई,

वही तो है सदियों का आमाल मेरा….!!

कोई ला के दे दे मुझे लाल मेरा …

کبھی بھوپال کر ڈالا۔۔۔عمران پرتاپگڑھی

پرانے حال سے بدتر سبھی کا حال کر ڈالا

کہیں کشمیر کر ڈالا۔۔۔ بھوپال کر ڈالا

کہاں وعدہ تھا ہر کھاتیمیں 15 لاکھ آئینگے

کہاں سب لے لیا ہر شخش کو کنگال کر ڈالا

سیاست آپکی سانسو پہ پابندی کرا دیگی

مگر نفرت کے ماروں ںیں رضامندی کرا دیگی

یہ جنتا ہے رلاؤ مت اسے تم خون کے آنسو

اگر یہ جد پہ آئیگی تو نس بندی کرا دیگی

اور کتنا ستم یاد کروگے صاحب

اب کتنا ہمیں برباد کروگے صاحب

خدکی اولاد نہیں ہے تو بتاؤ اتنا

کتنی مانؤکو بے اولاد کروگے صاحب

سرحد پر دہشت گردو کا قبضہ ہے

ملک پہ جھوٹے ہمدردو نکا قبضہ ہے

ایک بدلے دس سرونکی امید نہ رکھ

دل ہی تجھج پر نا مردونکا قبضہ ہے

اب روشن دان کی باتیں کرتا ہے۔

ایک کشمیر سنبھالے نہی سمبھلتا ہے

اور بلچستان کی باتیں کرتا ہے

اپنے سبھی پیادوں کی نام بدل ڈالو

تاریخی یادوں کا نام بدل ڈالو

اکبر روڈ کے نام بدل نیسے پہلے

اپنے دامادوں کا نام بدل ڈالو

٭

گُھرانے والوں کو آگ ببولا کرکے چھوڑ دیا

ادھر ادھر بس جھول رہے ہیں جھول کرکے چھوڑ دیا

امت شاہ کو لالو نے لولا کرکے چھوڑ دئیے

چائے چائے کرتے تھے۔۔۔ گائے۔۔۔ گائے کرتے ہیں

جگے ہیں دلت جب سے ہائے ہائے کرتیں ہے

تین سال باقی ہے آنے دو ذرا انہیں

دل ہی بھی یہ کہدیگی بائے بائے کرتے ہیں۔

جو نفرت کے سبب کی تھی وہ للکار کیس کی تھی

ہمارے خوون کی پیاسی تھی وہ تلوار کیس کی تھی

ہماری گردن مت کاٹیے بس یہ بتا دجیے

جیسے تم پہنکے بھاگے تھےوہ سلوار کیس کی تھی

لہو کی بات کرتا ہے قتل کی بات کرتا ہے

وہ کاروباری کے ساتھ دھن کی بات کرتا ہے

ہمارے ملک نے کیسا نمونا چن لیا ہے یارو

وطن کی بات کرنی تھی تو من کی بات کرتا ہے۔

……۔

ہاتھونکی صفائی چھپاتا ہے

وہ کالی کمائی چھوپاتا ہے

دعویٰ ہے مسیحائی کا مگر

وہ اپنی ُلگائی چھوپاتا ہے

میڈیا نے گڑہ رکھا ہے

وہ جوٹھی شان کا کیا ہوگا

جؤ بیوی کا نہ ہوا بھلا

وہ ہندُستاں کا کیا ہوگا

سنا تھا که بیحد سنہری ہے دہلی،

سمندر سی خاموش گہری ہے دہلی !

مگر ایک ماں کی صدا سن نہ پائے،

تو لگتا ہے گونگی ہے بہری ہے دہلی !!

وہ آنکھوں میں اشکوں کا دریا سمیٹے

، وہ امید کا اک نظریہ سمیٹے !

یہاں کہہ رہی ہے وہاں کہہ رہی ہے

تڈپ کرکے یہ ایک ماں کہہ رہی ہے !

کوئی پونچھتا ہی نہیں حال میرا۔۔۔۔۔!

کوئی لا کے دے دے مجھے لال میرا۔۔۔!

اسے لے کے واپس چلی جاؤنگی میں،

پلٹ کر کبھی پھر نہیں آؤنگی میں !

بڈھاپے کا میرے سہارا وہی ہے،

وہ بچھڑا تو زندہ ہہی مر جاؤنگی میں !

میری چیخ اور میری فریاد کہنا،

یہ مودی سے اک ماں کی روداد کہنا !

کہیں جھوٹھ کی شخصیت بہہ نہ جائے،

یہ نفرت کی دیوار چھت بہہ نہ جائے !

ہے اک ماں کے اشکوں کا سیلاب صاحب،

کہیں آپکی سلطنت بہہ نہ جائے !!

وہ ہے زندگی بھر کی میری کمائی،

وہی تو ہے صدیوں کا اعمال میرا۔۔۔۔!!

کوئی لا کے دے دے مجھے لال میرا

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زمرے

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