Posted by: Bagewafa | دسمبر 2, 2016

दुश्मन है मेरी मौत के सारे फ़िराक में—- शमीम अंसारी

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दुश्मन है मेरी मौत के सारे फ़िराक में—- शमीम अंसारी

 

दुश्मन है मेरी मौत के सारे फ़िराक में

मरते है बच्चे औरते अब भी इराक़ में

शोलों की बारिशों से ये भीगा है सीरिया

मर मर के बच्चे औरते मिलते है राख़ में

कुर्सी है इनकी शान अजब इत्तेफ़ाक़ है

मर जाये सारी उम्मत मिट जाये ख़ाक़ में

पहले भी कुछ फ़रिश्तों को जन्नत हुई अता

लाहौर का वो पेड़ था लाशें थी शाख़ में

कोशिश है ये शमीम के क़िरदार हो बुलंद

इंसानियत की बात मेरी जाये पाक में

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Responses

  1. Bahot umdah… Shandaar

  2. मा अस्सलाम…बहुत बहुत शुक्रियह जनाब !


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