Posted by: Bagewafa | دسمبر 21, 2016

माँ मेरे गूंगे शब्दों को….- बेकल उत्साही

माँ मेरे गूंगे शब्दों को….- बेकल उत्साही

‘माँ मेरे गूंगे शब्दों को
गीतों का अरमान बना दे .
गीत मेरा बन जाये कन्हाई,
फिर मुझको रसखान बना दे .

देख सकें दुख-दर्द की टोली,
सुन भी सकें फरियाद की बोली,
माँ सारे नकली चेहरों पर
आँख बना दे,कान बना दे.

मेरी धरती के खुदगर्जों ने
टुकड़े-टुकड़े बाँट लिये हैं,
इन टुकड़ों को जोड़ के मैया
सुथरा हिन्दुस्तान बना दे .

गीत मेरा बन जाये कन्हाई,
फिर मुझको रसखान बना दे’

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