Posted by: Bagewafa | دسمبر 23, 2016

फ़ासिला है कि कम नहीं होता….काबिल अजमेरी اصلہ ہے کہ کم نہیں ہوتا۔۔۔۔۔ قابل اجمیری

فاصلہ ہے کہ کم نہیں ہوتا۔۔۔۔۔ قابل اجمیری

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عام فیضانِ غم نہیں ہوتا

ہر نفس محترم نہیں ہوتا

نامرادی نے کردیا خوددار

اب سرِ شوق خم نہیں ہوتا

راستہ ہے کہ کٹتا جاتا ہے
فاصلہ ہے کہ کم نہیں ہوتا

وقت کرتا ہے پرورش برسوں
حادثہ ایک دم نہیں ہوتا

ٹوٹ جاتا ہے دل مگر قابل
عشق مانوسِ غم نہیں ہوتا

फ़ासिला है कि कम नहीं होता….काबिल अजमेरी

 

आम फैज़ान-ए-ग़म नहीं होता
हर-नफ़स मुहतरम नहीं होता

नामुरादी ने कर दिया ख़ुद्दार
अब सर-ए-शौक़ ख़म नहीं होता

रास्ता है कि कटता जाता है
फ़ासिला है कि कम नहीं होता

वक़्त करता है परवरिश बरसों
हादिसा एक दम नहीं होता

टूट जाता है दिल मगर काबिल

इशक़ मानूस-ए-ग़म नहीं होता

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زمرے

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