Posted by: Bagewafa | فروری 6, 2017

दिल बहलता नहि_मुहम्मदअली वफा ………دل بہلتا نہیں_ مُحمّد علی وفا

دل بہلتا نہیں_ مُحمّد علی وفا

 

خوابوں کی بارات سے دِل بہلتا نہیں

خُوشیوں کی خیرات سے دِل بہلتا نہیں

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برسے نہیں تُم برسنے کے زمانے میں

بے موسمی برسات سے دِل بہلتا نہیں

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آئیں ہیں تو کُچھ کہو کے دِل تڑپ اٹھے

یہ بے تُکے اِرشاد سے دِل بہلتا نہیں

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دِل کی گھٹن بڑھ گئ دیِدارسے تیرے

بے رُخی سی رات سے دِل بہلتا نہیں

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شورو شرابا بن گئ   تیری کہا نی بھی

اب کسی بھی بات سے دل بہلتا نہیں

दिल बहलता नहि_मुहम्मदअली वफा 

 

ख्वाबोंकी बारात से दिल बहलता नहि

खूशियोंकी खैरात से दिल बहलता नहि

 

 

बरसे नहि   तुम  तो बरसने के जमाने में

बे मौसमी बरसात से दिल .बहलता नहि

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आयें है तो कुछ कहो  के दिल तडप उठे

बे तूके  ईरशाद से दिल बहलता नहि

 .

 

दिलकी घुंटन बढ गई दिदारसे तेरे

बे रूखीसी रात से दिल बहलता नहि

 

शोरो शराबा बना गई  तेरी कहानी भी

अब कीसीभी बात से दिल बहलता नहि

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زمرے

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