Posted by: Bagewafa | مارچ 18, 2017

बारिश, हां वही बारिश

बारिश, हां वही बारिश 

बारिश, हां वही बारिश

बारिश, हां वही बारिश, वही बारिश जो आसमान से आती थी,
बूंदों में गाती थी, पहाड़ों से फिसलती थी, नदियों में चलती थी,नहरों में मचलती थी, बारिश…
हां, हां वही बारिश, जो आजकल कहीं खो गई है, या फिर थककर सो गई है,
शायद ऐसा भी हो सकता है, बिना आंसू बादल रो सकता है
हमने भी कितने पेड़ तोड़ दिए, संसद की कुर्सियों में जोड़ दिए,
हमने कुएं बुझा दिए, नदियां सूखा दीं, विकास की ताकत से कुदरत झुका दी।
शुक्र है, अब बच्चे शर्म से नहीं मरेंगे, चुल्लू भर पानी के लिए जरूर दुआ करेंगे,
हम शेख चिल्ली नहीं, हम कहां साख पर बैठे हैं,
हम सब अपने शहरों में गांव की राख पर बैठे हैं,
शहर में आज भी पानी कम नहीं, मगर पता नहीं क्यों हमारी आंखें नम नहीं,
जवान देश की मिट्टी के लिए, किसान खेत की मिट्टी के लिए परेशान है,जाग रहा है पता नहीं शहरों की भीड़ में ,कौन किसके लिए जाग रहा है, किसके लिए भाग रहा है।
किसान की समस्या खत्म नहीं होती, पैकेज तो हर साल अस्सी है,
एक भी काम नहीं आता, छुटकारे के लिए बस, एक रस्सी है,
परेशान दोनों हैं, हम सास बहू के रिश्तों में, और किसान लोन की किश्तों में।
बैंक, बीमार, पेस्टीसाइड, दहेज, मंत्रालय, किसान कहां-कहां भटक सकता है,
इंसानों से अच्छा तो आज सूखा पेड़ है, कम से कम उससे लटक तो सकता है।
लेकिन कब तक, कब तक हाथों पर हाथ धरे बारिश का इंतजार करें?
मेंढक की शादी से दिल बहलाएं, नंदी बैल की हां में हां मिलाएं कब तक?
सुना था राजस्थाना में एक जुहरे वाला बाबा है..सहरा से पानी लेककर आया है,राजिंद्रसिंह नाम है दुनिया में छाया है..हमारी बीच भी कोई होगा न..बारिश वाला बाबा.

फिल्मों में बहुत देखे हैं, हां वही, वो आ गया है, सस्ती, सुंदर, टिकाऊ बारिशवाला,
वो फिल्मी नहीं है, हमने कहां उसे ठीक से जाना है, कोई भगवान नहीं, कोई बाबा नहीं, बस हमारा नाना है।
अब हम जान नहीं देंगे, जान लगा देंगे, बारिश को बुलाने के काम में, हमारे अपने नाम में,
उम्मीद है गांव को देख आपकी भीगी आंखें सरकार ही नहीं, भगवान को भी जगा देंगी
अगले साल सस्ती सुंदर टिकाऊ बारिश हम सबको भिगा देगी, हम सबको भिगा देगी

2-बारिश !

हां मेरे दोस्त वही बारिश.
वही बारिश जो आसमान से आती है
बूंदों मैं गाती है
पहाड़ों से फिसलती है
नदियों मैं चलती है
नहरों मैं मचलती है
कुंए पोखर से मिलती है
खप्रेलो पर गिरती है
गलियों मैं फिरती है
मोड़ पर संभालती है
फिर आगे निकलती है व
ही बारिश
ये बारिश अक्सर गीली होती है
इसे पानी भी कहते हैं उर्दू में
आप मराठी में पानी
तमिळ में कन्नी कन्नड़ में नीर
बंगला में… जोल केह्ते हैं
संस्‍कृत में जिसे वारि
नीर जीवन पै अमृत पै अम्बु भी केह्ते हैं
ग्रीक में इसे aqua pura
अंग्रेजी में इसे water फ्रें
च में औ’ और केमिस्ट्री में H2O केह्ते हैं
ये पानी आंखों से ढलता है तो आंसू कहलता है
लेकिन चेहरे पर चढ़ जाये तो रुबाब बन जाता है
हां…कोई शर्म से पानी पानी हो जाता है
और कभी कभी यह पानी सरकारी फाइलों में अपने कुंए समेत चोरी हो जाता है
पानी तो पानी है
पानी जिन्दगानी है
इसलिए जब रूह की नदी सूखी हो
और मन का हिरण प्यासा हो
दीमाग में लगी हो आग
और प्यार की घागर खाली हो
तब मैं….हमेशा ये बारिश नाम का गीला पानी लेने की राय देता हूं
मेरी मानिए तो
ये बारिश खरीदिये
सस्ती सुन्दर टिकाऊ बारिश
सिर्फ 5 हज़ार रुपये में
इस्से कम में दे कोई तो चोर की सज़ा वो मेरी
आपकी जूती सिर पर मेरी
मेरी बारिश खरीदये
सस्ती सुन्दर टिकाऊ बारिश

 

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