Posted by: Bagewafa | مئی 18, 2017

हम ना होंगे जब महफिल में –संदीप करोसिया

हम ना होंगे जब महफिल में –संदीप करोसिया

 .

 

जीते जी आराम कहाँ है ।।

 मरकर भी विश्राम कहाँ है ।।

 

हमने प्यार किया हम दोषी ।।

 आपके सर इल्जाम कहाँ है ।।

.

रूके रूके हैं सारे पुर्जे ।।

 जाने चक्का जाम कहाँ है ।।

.

शहर नहीं सारी दुनिया में ।।

 हम जैसे बदनाम कहाँ है ।।

.

हमको क्यों बुलाएंगे वो ।।

 अभी हमारा नाम कहाँ है ।।

.

हम ना होंगे जब महफिल में ।।

 सब पूछेंगे श्याम कहाँ है ।।

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