Posted by: Bagewafa | مئی 29, 2017

جینے کے بہانے سبھی رسوا یہاں ہوئے۔۔۔۔۔۔۔۔محمد علی وفا

جینے کے بہانے سبھی رسوا یہاں ہوئے۔۔۔۔۔۔۔۔محمد علی وفا

This Ghazal was read on Mehman tv Mushayera by SSTV ,Toronto on 25 May 2017.It will be aired from SSTV Toronto on rogrs cable 851 on Eid dy

जलने दे मेरे दोस्त_मोहंमदअली’वफा’

 

चलताहुं  जीस तरह में चलने दे मेरे दोस्त
जलता हुं तेरी यादमें जलने दे मेरे दोस्त.

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वल्लाह पुछ्ना नही मंझिल का भी पता
मेरे कदमको युंही मचलने दे मेरे दोस्त.

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होता हुं तुलुअ में मगर मेरी अदासे

तारिक्यां छानेको है ढलने दे मेरे दोस्त.

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हो जाए खूश्क ही न तेरे अश्ककी तरह
दरियाओंको इन आंखसे बहने दे मेरे दोस्त

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ईसरार से रुकता नहीं खुशियोंका काफला
गमके बादलोंको भी घिरने दे मेरे दोस्त.

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जीनेके बहाने तो सभी रुस्वा यहां हुए
ईज्जत के साथ मोत से मरने दे मेरे दोस्त.

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