Posted by: Bagewafa | جون 3, 2017

बरसों के बाद भी- मुहम्मद अली वफा برسوں کے بعد بھی۔۔۔۔۔محمدعلی وفا

برسوں کے بعد بھی۔۔۔۔۔محمدعلی وفا

बरसों के बाद भी- मुहम्मद अली वफा

.

जालिम रहा है आसमां बरसों के बाद भी

अदावत भरा है ये झमां बरसों के बाद भी

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पानी बने बहता रहा  दरिया  ये खूनका

फिर भी नही कोइ आशनां बरसों के बाद भी

 .

बेठे रहे तुम हाथ बांधे आती शरम नहीं

कुछ भी नहीं तुमको अयां बरसों के बाद भी

 .

अबभी सहर को ढुंढते हो वो भी रातको

तुम पर  हसेगी ये शमां बरसों के बाद भी

 .

मोहिद बने रहना यहां  होता गूनाह कया

जारी अभी तक ईमतेहां  बरसों के बाद भी

 .

हमतो बने  बारिश कदे  जंगल जरा देखो

कटते रहे हमतो यहां बरसों के बाद भी

 .

मांगा पसीना तो हमारा खूने जिगर  दिया

फिरभी बने हम ही निशां बरसों के बाद भी

 .

घर भी गये लूटे यहां  असमत भी लूट गइ

मिलता नहीं कोइ पासबां बरसों के बाद भी

 .

आई कभी खद्दर कभी तो  रंगे जाफरां

दुश्मन बने बूढे जवां बरसों के बाद भी

 .

खंजर रहे  कातिल के हमही  पर घूमते

बन कर रहे मझलुम यहां  बरसों के बाद भी

 .

महरुम था ये चमन  बहारों की फसल से

छाई रही हमपर खिझां बरसों के बाद भी

दिलके फफोले ‘वफा’ खोलुं अब जा कर कहां

हसते रहे सब  सुन बयां बरसों के बाद भी

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