Posted by: Bagewafa | جون 5, 2017

देखता रहा—मुहम्मदअली वफा دیکھتا رہا۔۔۔۔ محمد علی وفا

 دیکھتا رہا۔۔۔۔ محمد علی وفا

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نفرت قدے کے بام کو دیکھتا رہا

زہر سے بھرے  جام کو دیکھتا رہا

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دن بھی گزارا تیری ظلمتیں لئے

میں الجھنوں کی شام کو دیکھتا رہا۔

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جب ہوا ذکر ٹوٹے ہوئے دل کا

 تیرے ہی نام کو دیکھتا رہا

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اب خریدے کہاں سے یہ غریب دل

تیرے لگائے دام کو دیکھتا رہا

 .

دسرونکی طرف وفا نظریں نہیں اٹھی

میں میرے ہی کام کو دیکھتا رہا

देखता रहा—मुहम्मदअली वफा

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नफरतकदे के बाम को देखता रहा

ज़हरसे भरे   जाम को देखता रहा

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दिन भी गुजारा तेरी जुल्म्तें लिये

में उल्झनों की शाम को देखता रहा.

 .

जब हुआ जिकर तूटे हुए दिल का

एक  तेरे ही नाम को देखता रहा

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अब खरीदे कहां से ये गरीब दिल

तेरे लगाये   दाम को देखता रहा

 .

दुसरोंकी तरफ वफा नजरें नहीं उठी

में  मेरे ही काम को देखता रहा

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زمرے

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