Posted by: Bagewafa | اگست 6, 2017

وہ قتل بھی کرتیں ہیں تو چرچا نہیں ہوتا۔۔۔۔۔۔اکبر اِلہ ابادیचर्चा नहीं होता—अकबर ईलाहाबादी

وہ قتل بھی کرتیں ہیں تو چرچا نہیں ہوتا۔۔۔۔۔۔اکبر اِلہ ابادی

चर्चा नहीं होता—अकबर ईलाहाबादी

.

गमझह नहीं होता के इशारा नहीं होता

आंख उनसे जो मिलती हैतो क्या क्या नहीं होता

.

जलवाह न हो मानीका तो सुरत का असर क्या

बुल बुल गुले तस्वीरका शेअदा नहीं होता

.

अल्लाह बचाए मरज़े ईश्क़ से दिलको

सुनते हैं कि ये आरज़ा अच्छा नहीं होता

.

तशबीह तेरे चहेरेको क्या दुं गुले तरसे

होता है शगुफ्ता मगर इतना नहीं होता

.

में नज़अ में हुं आएं तो एहसान है उनका

लेकिन ये समज़ ले के तमाशा नहीं होता

.

हम आह भी करतें हैं तो हो ज़ाते हैं बदनाम

वओ क़त्ल भी करतें झै तो चर्चा नहीं होता

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