Posted by: Bagewafa | اگست 17, 2017

हमारा ख़ून अमानत है—-साहिर लुधियानवी ہمارا خون امانت ہے۔۔۔۔۔ساحر لدھیانوی

ہمارا خون امانت ہے۔۔۔۔۔ساحر لدھیانوی 

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ہمارا خون امانت ہے نسل نو کے لیے

ہمارے خون پہ لشکر نہ پل سکیںگے کبھی

کہو کہ آج بھی ہم سب اگر خموش رہے

تو اس دمکتے ہوئے خاکداں کی خیر نہیں

جنوں کی ڈھال ہوئی ایٹمی بلاؤں سے

زمیں کی خیر نہیں، آسماں کی خیر نہیں

گزشتہ جنگ میں گھر ہی جلے مگر اس بار

عجب نہیں کہ یہ تنہائیاں بھی جل جائیں

گزشتہ جنگ میں پیکر جلے مگر اس بار

عجب نہیں کہ یہ پرچھائیاں بھی جل جائیں

اسی خوف نے ساحر کو خواب بننے کے لیے مہمیز کیا:

آؤ کہ کوئی خواب بنیں، کل کے واسطے

ورنہ یہ رات، آج کے سنگین دور کی

ڈس لے گی جان و دل کو کچھ ایسے کہ جان و دل

تاعمر پھر نہ کوئی حسیں خواب بن سکیں

 

हमारा ख़ून अमानत है—-साहिर लुधियानवी

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हमारा ख़ून अमानत है नस्ल-ए-नौ के लिए

हमारे ख़ून पे लश्कर ना पल सकेंगे कभी

कहो कि आज भी हम सब अगर खामोश रहे

तो इस दमकते हुए ख़ाक-दाँ की ख़ैर नहीं

जुनूँ की ढाल हुई ऐटमी बलाओं से

ज़मीं की ख़ैर नहीं, आसमां की ख़ैर नहीं

गुजिश्ता जंग में घर ही जले मगर इस बार

अजब नहीं कि ये तन्हाइयाँ भी जल जाएं

गुजिश्ता जंग में पैकर जले मगर इस बार

अजब नहीं कि ये परछाईयां भी जल जाएं

इसी ख़ौफ़ ने साहिर को ख्वाब बनने के लिए मेहमिज़ किया:

आओ कि कोई ख़ाब बुनें, कल के वास्ते

वर्ना ये रात, आज के संगीन दौर की

डस लेगी जान-ओ-दिल को कुछ ऐसे कि जान-ओ-दिल

ता उम्र फिर ना कोई हसीं ख्वाब बन सकें

 

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