Posted by: Bagewafa | اکتوبر 16, 2017

آیئنہ بات کرنے پہ مجبور ہو گیا۔۔۔۔۔۔بشیر بدر

آیئنہ بات کرنے پہ مجبور ہو گیا۔۔۔۔۔۔بشیر بدر

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया —-बशीर बद्र

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

जिसको गले लगा लिया वो दूर हो गया

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कागज में दब के मर गए कीड़े किताब के

दीवाना बे पढ़े-लिखे मशहूर हो गया

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महलों में हमने कितने सितारे सजा दिये

लेकिन ज़मीं से चाँद बहुत दूर हो गया

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तन्हाइयों ने तोड़ दी हम दोनों की अना

आईना बात करने पे मज़बूर हो गया

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सुब्हे-विसाल पूछ रही है अज़ब सवाल

वो पास आ गया कि बहुत दूर हो गया

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कुछ फल जरूर आयेंगे रोटी के पेड़ में

जिस दिन तेरा मतालबा मंज़ूर हो गया

 


زمرے

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