Posted by: Bagewafa | اکتوبر 20, 2017

آشنا غم سے ملا راحت سے بیگانہ ملا……..کلیم عاجز.आश्ना ग़म से मिला राहत से बेगाना मिला—–कलीम आजिज़

 

آشناغم سے ملا راحت سے بیگانہ ملا……..کلیم عاجز

آآشنا غم سے ملا راحت سے بیگانہ ملا

دل بھی ہم کو خوبیٔ قسمت سے دیوانہ ملا

.

بلبل و گل شمع و پروانہ کو ہم پر رشک ہے

درد جو ہم کو ملا سب سے جدا گانہ ملا

.

ہم نے ساقی کو بھی دیکھا پیر مے خانہ کو بھی

کوئی بھی ان میں نہ راز آگاہ مے خانہ ملا

.

سب نے دامن چاک رکھا ہے بقدر احتیاج

ہم کو دیوانوں میں بھی کوئی نہ دیوانہ ملا

.

ہم تو خیر آشفتہ ساماں ہیں ہمارا کیا سوال

وہ تو سنوریں جن کو آئینہ ملا شانہ ملا

.

کیا قیامت ہے کہ اے عاجزؔ ہمیں اس دور میں

طبع شاہانہ ملی منصب فقیرانہ ملا   

आश्ना ग़म से मिला राहत से बेगाना मिला—–कलीम आजिज़

 

आश्ना ग़म से मिला राहत से बेगाना मिला

दिल भी हम को ख़ूबी-ए-क़िस्मत से दीवाना मिला

.

बुलबुल-ओ-गुल शम-ओ-परवाना को हम पर रश्क है

दर्द जो हम को मिला सब से जुदा-गाना मिला

.

हम ने साक़ी को भी देखा पीर-ए-मय-ख़ाना को भी

कोई भी इन में न राज़-आगाह-ए-मय-ख़ाना मिला

.

सब ने दामन चाक रक्खा है ब-क़द्र-ए-एहतियाज

हम को दीवानों में भी कोई न दीवाना मिला

.

हम तो ख़ैर आशुफ़्ता-सामाँ हैं हमारा क्या सवाल

वो तो सँवरें जिन को आईना मिला शाना मिला

.

क्या क़यामत है कि ऐ ‘आजिज़’ हमें इस दौर में

तब्अ’ शाहाना मिली मंसब फ़क़ीराना मिला

Advertisements

زمرے

%d bloggers like this: