Posted by: Bagewafa | جنوری 26, 2018

वतनको खून दे दिया_ मोहंमदअली वफा

वतनको खून दे दिया_ मोहंमदअली वफा

ईंफाल जो मांगा वतनको खून दे दिया,

फिर भी हमारी कद्र के दिये नही जले.

अब्दुल हमीद, अशफाकुल्लाह भी मिटे,

आझाद, मदनी,शेखको तो कौन जानता.

मुहम्मदअली जौहर भी याद न आये,

आझादी या मौत का फतवा दिया हमें.

बुखारी अताउल्लाह भी मीटे जमीन से,

कौन पूछता हसरत मोहानी के नाम को.

अंसारी,अजमलखां,किचलु भी नदारद,

झाकिर,फखरुद्दीन, को तो कौन जानता.

किदवाईके अहसां भी भूल गये तुम,

कर्नल आझाद हिन्द कभी याद न आया.

शिकवा नहीं दिलके फफोले है ये ‘वफा’

आझादी ए मुल्कका किस्सा है ये वफा.

कुछ्भी हो वतन अपना है ,आन दे देंगे,

भारत की हिफाजत के लिये जान दे देंगे.

ईंफाल=प्रस्वेद

मदनी=मौलान हुसेन अहमद मदनी(देवबंद)रेशमी रूमालकी तहरीकमें शेखुल हिन्द महमदुलहसन के साथ माल्टा  (युरोप) में ढाई साल तक जेल  काटी.

शेख= शेखुल हिन्द महमदुलहसन (रेशमी रूमाल की तहरीकके रुहेरवां)

रेशमी रूमाल नी तहरीक= भारत की आझादी की लीये  शेखुल हिन्द महमदुलहसन, मौलाना हुसेन अहमद मदनी(देवबंद)और उनके वफादार साथीओं की एक जां बाज तहरीक.


زمرے

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