Posted by: Bagewafa | فروری 10, 2018

कासगंज हिंसा…… हिमांशु कुमार

कासगंज हिंसा…… हिमांशु कुमार

 

कासगंज हिंसा का शिकार हुए चंदन पर ब्लॉगर हिमांशु कुमार ने किए विचार व्यक्त, कहा अगर कोई दंगाई….

मुजफ्फरनगर में दंगे हुए उसके बाद मैं वहां काम करने गया. दंगों की वजह दो जाट लड़कों की मौत बताई गई थी. मैंने उस गांव में जाकर जब लोगों से बात की तो पता चला कि मारे गए दोनों जाट लड़के एक मुस्लिम लड़के शाहनवाज की हत्या करने आए थे.

और उनके साथ चार लोग और भी थे. बाकी के वह चारों हत्यारे निकल भागने में सफल हुए. यह दोनों हत्यारे भीड़ के हत्थे चढ़ गए. भीड़ में हिंदू और मुसलमान दोनों थे. मामला सिर्फ इन दो जाट लड़कों की मौत को लेकर ही बनाया गया.

लेकिन जिस मुस्लिम लड़के की हत्या इन लोगों ने कर दी. उस शाहनवाज़ की हत्या के आरोप में आज तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया. जबकि मारे गए दो जाट लड़कों में से एक का पिता जो पुराना हिस्ट्रीशीटर रहा है

उसने उस मुस्लिम लड़के को मारा था. लेकिन आज तक ना स्थानीय पुलिस, ना जि़ला अदालत, ना सुप्रीम कोर्ट किसी ने भी यह नहीं कहा कि मारे गए लड़के शाहनवाज की हत्या की रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी गई ?

और उस की हत्या के आरोप में आज तक कोई गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ ? सजा तो जाने ही दीजिए. इसी तरह सहारनपुर में शब्बीरपुर में जो दलितों की बस्ती राजपूतों ने जलाई.

आग लगाते समय अपनी ही दंगाई भीड़ के भगदड़ में सांस घुटने से एक राजपूत लड़के की मौत हुई. उसे लेकर दलितों को बुरी तरह पीटा गया. घर जला दिए गए. संपत्ति का नुकसान किया.

ठीक इसी तरह कासगंज में दंगा करने गया लड़का मारा गया. नफरत फैलाते समय. दंगा करते समय. हत्या करते समय. अगर कोई हत्यारा या दंगाई मारा जाता है. तो उसे शहीद क्यों घोषित करते हो ?

सिर्फ इसलिए क्योंकि आप कमजोर अल्पसंख्यक समुदाय. या दलित जातियों को खलनायक. और खुद को बहुत महान नायक और देशभक्त घोषित करना चाहते हो.

और इस महानता के कारण इस देश पर हमेशा राज करते रहना चाहते हो. अपनी चालाकी समझो यार. जिस दिन तुम्हारी यह चालाकी लोगों की समझ में आ जाएगी

उस दिन शर्म से कहां मूंह छिपाओगे ?

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