Posted by: Bagewafa | اپریل 4, 2018

रोटी और संसद – धूमिल

रोटी और संसद – धूमिल

एक आदमी

रोटी बेलता है

एक आदमी रोटी खाता है

एक तीसरा आदमी भी है

जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है

वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है

मैं पूछता हूँ–

‘यह तीसरा आदमी कौन है ?’

मेरे देश की संसद मौन है।

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