Posted by: Bagewafa | جولائی 10, 2018

۔ہجوم دیکھ کے رستہ نہیں بدلتے ہم۔۔۔۔۔حبیب جالب हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम…हबीब जालिब .

ہجوم دیکھ کے رستہ نہیں بدلتے ہم ۔۔۔۔۔حبیب جالب

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ہجوم دیکھ کے رستہ نہیں بدلتے ہم

کسی کے ڈر سے تقاضا نہیں بدلتے ہم

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ہزار زیر قدم راستہ ہو خاروں کا

جو چل پڑیں تو ارادہ نہیں بدلتے ہم

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اسی لیے تو نہیں معتبر زمانے میں

کہ رنگ صورت دنیا نہیں بدلتے ہم

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ہوا کو دیکھ کے جالبؔ مثال ہم عصراں

بجا یہ زعم ہمارا نہیں بدلتے ہم

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हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम…हबीब जालिब

ہ.

हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम

किसी के डर से तक़ाज़ा नहीं बदलते हम

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हज़ार ज़ेर-ए-क़दम रास्ता हो ख़ारों का

जो चल पड़ें तो इरादा नहीं बदलते हम

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इसी लिए तो नहीं मो’तबर ज़माने में

कि रंग-ए-सूरत-ए-दुनिया नहीं बदलते हम

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हवा को देख के ‘जालिब’ मिसाल-ए-हम-अस्राँ

बजा ये ज़ोम हमारा नहीं बदलते हम

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