Posted by: Bagewafa | جولائی 19, 2018

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी…..परवीन शाकिर آج کی شب تو کسی طور گزر جائے گی۔۔۔۔۔پروین شاکر

آج کی شب تو کسی طور گزر جائے گی۔۔۔۔۔پروین شاکر

 

آج کی شب تو کسی طور گزر جائے گی

رات گہری ہے مگر چاند چمکتا ہے ابھی

میرے ماتھے پہ ترا پیار دمکتا ہے ابھی

میری سانسوں میں ترا لمس مہکتا ہے ابھی

میرے سینے میں ترا نام دھڑکتا ہے ابھی

زیست کرنے کو مرے پاس بہت کچھ ہے ابھی

تیری آواز کا جادو ہے ابھی میرے لیے

تیرے ملبوس کی خوشبو ہے ابھی میرے لیے

تیری بانہیں ترا پہلو ہے ابھی میرے لیے

سب سے بڑھ کر مری جاں تو ہے ابھی میرے لیے

زیست کرنے کو مرے پاس بہت کچھ ہے ابھی

آج کی شب تو کسی طور گزر جائے گی!

آج کے بعد مگر رنگ وفا کیا ہوگا

عشق حیراں ہے سر شہر صبا کیا ہوگا

میرے قاتل ترا انداز جفا کیا ہوگا!

آج کی شب تو بہت کچھ ہے مگر کل کے لیے

ایک اندیشۂ بے نام ہے اور کچھ بھی نہیں

دیکھنا یہ ہے کہ کل تجھ سے ملاقات کے بعد

رنگ امید کھلے گا کہ بکھر جائے گا

وقت پرواز کرے گا کہ ٹھہر جائے گا

جیت ہو جائے گی یا کھیل بگڑ جائے گا

خواب کا شہر رہے گا کہ اجڑ جائے گا

 

 

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी…..परवीन शाकिर

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी

रात गहरी है मगर चाँद चमकता है अभी

मेरे माथे पे तिरा प्यार दमकता है अभी

मेरी साँसों में तिरा लम्स महकता है अभी

मेरे सीने में तिरा नाम धड़कता है अभी

ज़ीस्त करने को मिरे पास बहुत कुछ है अभी

तेरी आवाज़ का जादू है अभी मेरे लिए

तेरे मल्बूस की ख़ुश्बू है अभी मेरे लिए

तेरी बाँहें तिरा पहलू है अभी मेरे लिए

सब से बढ़ कर मिरी जाँ तू है अभी मेरे लिए

ज़ीस्त करने को मिरे पास बहुत कुछ है अभी

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी!

आज के ब’अद मगर रंग-ए-वफ़ा क्या होगा

इश्क़ हैराँ है सर-ए-शहर-ए-सबा क्या होगा

मेरे क़ातिल तिरा अंदाज़-ए-जफ़ा क्या होगा!

आज की शब तो बहुत कुछ है मगर कल के लिए

एक अंदेशा-ए-बेनाम है और कुछ भी नहीं

देखना ये है कि कल तुझ से मुलाक़ात के ब’अद

रंग-ए-उम्मीद खिलेगा कि बिखर जाएगा

वक़्त पर्वाज़ करेगा कि ठहर जाएगा

जीत हो जाएगी या खेल बिगड़ जाएगा

ख़्वाब का शहर रहेगा कि उजड़ जाएगा

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زمرے

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