Posted by: Bagewafa | نومبر 7, 2018

‘मेरे कवि दोस्त’—– नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी

‘मेरे कवि दोस्त’—– नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी

कवियों को यूं पुकार रहे हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी- ‘मेरे कवि दोस्त’

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

यह कविता इन दिनों ख़ूब वायरल हो रही है जिसे नवाज़ और रमनीक सिंह दोनों साथ मिलकर सुना रहे हैं, बोल कुछ यूं हैं

मेरे कवि दोस्त वक़्त आ गया है

कि कविता मंडलियों और जत्थों से

आज़ाद होकर बीच सड़क पर धरना दे

तुम्हारी कविता मेरे कवि दोस्त

अपने महबूब से मिलने उससे बिछड़ने

उसके जाने पर खाली हुए मकान की

कहानी कह-कह कर थक गयी है

देश मूल्यों से खाली हो रहा है

ओछेपन ने नैतिकता को रद्दी

के भाव बेच दिया है

पत्रकारों को * की औलाद कहना

हो गया है हर बहस का

आख़िरी जवाब

किसान के घटते और बिल्डर

के बढ़ते पेट की गति समान हो गयी है

अनाज खिलाने वाला गोली खा रहा है

हमारी सड़कों पर छितरा

उसके पैर की छालों से निकला खून

हमारे शहर के माथे पर कलंक है

अपने बच्चों को लटकता देख भी

वो हमारे बच्चों के लिए

अन्न उगाना नहीं करेगा बंद

हमारी ख़ुदगर्ज़ी ने छोड़े होंगे

हमारे अंदर इंसानियत के कुछ अंश

तो हम पूछेंगे सवाल

नहीं खाएंगे खाना

जब हम पढ़ेंगे उनकी आत्महत्याओं के बारे में

आज़ाद हिंदुस्तान के सीवेज पाइप में

दम घुटकर मरता दलित

नफ़रत का दुकानें, धर्मों की लड़ाई में

आहुति देतीं निर्दोष बच्चियां

बन कर रह गयी हैं राजनीति का सस्ता औज़ार

आगे देखें यह वीडियो…

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