Posted by: Bagewafa | اگست 22, 2019

हम एक हैं….जनिसार अख्तर ہم ایک ہیں۔۔۔۔۔جانثار اختر

हम एक हैं….जनिसार अख्तर

एक है अपनी ज़मीं, एक है अपना गगन

एक है अपना जहाँ, एक है अपना वतन

अपने सभी सुख एक हैं, अपने सभी ग़म एक हैं

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

ये वक़्त खोने का नहीं, ये वक़्त सोने का नहीं

जागो वतन ख़तरे में है, सारा चमन खतरे में है

फूलों के चहरे ज़र्द हैं, ज़ुल्फ़ें फ़िज़ा की गर्द हैं

उम्दा हुआ तूफ़ान है, नरगे में हिंदुस्तान है

दुश्मन से नफ़रत फ़र्ज़ है, घर की हिफ़ाज़त फ़र्ज़ है

बेदार  हो बेदार हो, आमादा-ए-पैकार हो

कोरस: आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

ये है हिमाला की ज़मीं, ताज-ओ-अजंता की ज़मीं

संगम हमारी आन है, चित्तौड़ अपनी शान है

गुल्मर्ग का महका चमन, जमुना का तट गोकुल का बन

गंगा के धारे अपने हैं, ये सब हमारे अपने हैं

कह दो कोई दुश्मन नज़र, उठे न भूले से इधर

कह दो के हम बेदार हैं, कह दो के हम तय्यार हैं

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

उठो जवानां-ए-वतन, बाँधे हुए सर से कफ़न

उठो दख़न की ओर से, गंग-ओ-जमन की ओर से

पंजाब की दिल से उठो, सतलुज की साहिल से उठो

महाराष्ट्र की खाक से, दिल्ली की अर्ज़-ए-पाक से

बंगाल से गुजरात से, कश्मीर के बागात से

नेफ़ा से राजस्थान से, पुर्ख़ां के हिंदुस्तान से

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

       हम एक हैं, हम एक हैं, हम एक हैं

ہم ایک ہیں۔۔۔۔۔جانثار اختر

ایک ہے اپنی زمیں، ایک ہے اپنا گگن

ایک ہے اپنا جہاں، ایک ہے اپنا وطن

اپنے سبھی سکھ ایک ہیں، اپنے سبھی غم ایک ہیں

آواز دو، آواز دو ہم ایک ہیں، ہم ایک ہیں

آواز دو، آواز دو ہم ایک ہیں، ہم ایک ہیں

یہ وقت کھونے کا نہیں، یہ وقت سونے کا نہیں

جاگو وطن خطرے میں ہے، سارا چمن خطرے میں ہے

پھولوں کے چہرے زرد ہیں، زلفیں فضا کی گرد ہیں

عمدہ ہوا طوفان ہے، نرگے میں ہندستان ہے

دشمن سے نفرت فرض ہے، گھر کی حفاظت فرض ہے

بیدار ہو بیدار ہو، آمادۂ پیکار ہو

آواز دو، آواز دو ہم ایک ہیں، ہم ایک ہیں

یہ ہے ہمالہ کی زمیں، تاج واجنتا کی زمیں

سنگم ہماری آن ہے، چتوڑ اپنی شان ہے

گلمرگ کا مہکا چمن، جمنا کا تٹ گوکل کا بن

گنگا کے دھارے اپنے ہیں، یہ سب ہمارے اپنے ہیں

کہہ دو کوئی دشمن نظر، اٹھے نہ بھولے سے ادھر

کہہ دو کے ہم بیدار ہیں، کہہ دو کے ہم تیار ہیں

آواز دو، آواز دو ہم ایک ہیں، ہم ایک ہیں

اٹھو جواناں وطن، باندھے ہوئے سر پے کفن

اٹھو دکھن کی اور سے، گنگ وجمن کی اور سے

پنجاب کی دل سے اٹھو، ستلج کی ساحل سے اٹھو

مہاراشٹر کی خاک سے، دہلی کی عرض پاک سے

بنگال سے گجرات سے، کشمیر کے باغات سے

نیفہ سے راجستھان سے، پرخاں کے ہندستان سے

آواز دو، آواز دو ہم ایک ہیں، ہم ایک ہیں


زمرے

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