Posted by: Bagewafa | جون 20, 2021

अल्लाह  पे  यक़ी है …..शकील कादरी

 

अल्लाह  पे  यक़ी है …..शकील कादरी

 

क़ातिल को है ग़रूर बहुत क़त्लगाह पर

लेकिन फ़क़ीर की है नज़र ख़ानक़ाह पर

इल्ज़ाम  रौशनी  के  परिंदो के क़त्ल का

साबित करोगे कैसे? है आलमपनाह पर

इन्सानियत का चाहनेवाला हूँ इस लिये

सब कुछ लुटा रहा हूँ किसी की निगाह पर

जितने परिंदे ज़ख़्मी हैं तीरों से सब के सब

इल्ज़ाम ज़ख़्म देने का धरते हैं शाह पर

मैं हूँ फ़क़ीर कासे में अपना ही सर लिये

बेख़ौफ़ चल रहा हूँ ख़ुदा तेरी राह पर

इन्साफ़ की तवक़्क़ो अदालत से क्या रखें

उसने यक़ीन कर लिया झूटे गवाह पर

लगता है शाह को है परिंदो से दुश्मनी

नोंचे हुए पडे हैं  यहां गाह गाह पर

नटवर थे श्याम और सियाहफ़ाम थे बिलाल

फिर नाज़ क्यूं न हो मुझे रंगे सियाह पर

सरमद का मैं मुरीद हूं कहता हूं शान से

अल्लाह  पे  यक़ी है नहीं बादशाह पर

लगता है उस की आँखों में महेफ़ूज़ है हया

परदा जो डालता है किसी के गुनाह पर

होने न देगी ज़ुल्म किसी पर शकील अब

है मुझ को एतबार वतन की सिपाह पर

                                   शकील क़ादरी

(courtesy: Facebook)


زمرے

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