नज़रों से अब ये बोझ उठाया न जायेगा।……शकील क़ादरीظروں سے اب یہ بوجھ اٹھایا نہ جائے گا ۔۔۔۔۔۔ شکیل قادری

नज़रों से अब ये बोझ उठाया न जायेगा।……शकील क़ादरी

 

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ज़िक़्रे फ़रेबे यार सुनाया न जायेगा।

अब दर्दे दिल ज़बान पे लाया न जायेगा।

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मजबूर मैं भी हूँ कि बुलाया न जायेगा।

सच ये भी है कि आप से आया न जायेगा।

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मंज़र हर एक राह का लगता है ख़ूँचकाँ

नज़रों से अब ये बोझ उठाया न जायेगा।

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माँ ने पिलाया दूध वो इक ऐसा क़र्ज़ है

मरने के बाद भी जो चुकाया न जायेगा।

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ये कायनात यक़ता मुसव्विर का नक़्श है

जो मासिवा किसी से मिटाया न जायेगा।

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ख़ुद अपने क़त्ल के लिये मैं ने सजा लिया

मक़्तल किसी से ऐसे सजाया न जायेगा।

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जिस रोज़ मेरे दस्ते अक़ीदत ने आप का

"दामन पकड़ लिया तो छुड़ाया न जायेगा।”

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ग़ालिब का हो ख़याल कि फिर मीर का बयाँ

दिल में जो बस गया तो भुलाया न जायेगा।

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नज़रें मिला के उस ने अजब वा’दा ले लिया

जो हम से जिंदगी में निभाया न जायेगा।

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जो मिल रहा है ज़हन को फ़ानूसे क़ल्ब से

नूर ऐसा इन चराग़ों से पाया न जायेगा।

है अक़्स चश्मे शब में भी चहरे का आप के

जिस को बुरी नज़र से बचाया न जायेगा।

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ताउम्र हम को देना ख़ुदा लुक़्म ए हलाल

रिज़्के हराम होगा तो खाया न जायेगा।

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क़ुर्बान कर दे जान मैं ऐसा फ़क़ीर हूँ

बैठा जो तेरे दर पे, उठाया न जायेगा।

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मौमिन हूँ सच्चा इस लिये सर बेगुनाह का

हाथों से अपने काट के लाया न जायेगा।

आगे न तुझ से कोई निकल पाएगा "शकील”

जब तक ज़मीं पे तुझ को गिराया न जायेगा।

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ظروں سے اب یہ بوجھ اٹھایا نہ جائے گا ۔۔۔۔۔۔ شکیل قادری

 

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ذکرے فریب یار سنایا نہ جائے گا ۔

اب دردے دل زبان پہ لایا نہ جائے گا ۔

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مجبور میں بھی ہوں کہ بلایا نہ جائے گا ۔

سچ یہ بھی ہے کہ آپ سے آیا نہ جائے گا ۔

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منظر ہر ایک راہ کا لگتا ہے خوں چکاں

نظروں سے اب یہ بوجھ اٹھایا نہ جائے گا ۔

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ماں نے پلایا دودھ وہ اک ایسا قرض ہے

مرنے کے بعد بھی جو چکایا نہ جائے گا ۔

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یہ قائنات یکتا مصور کا نقش ہے

جو ماسوا کسی سے مٹایا نہ جائے گا ۔

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خود اپنے قتل کے لئے میں نے سجا لیا

مقتل کسی سے ایسے سجایا نہ جائے گا ۔

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جس روز میرے دستِ عقیدت نے آپ کا

“دامن پکڑ لیا تو چھڑایا نہ جائے گا ۔”

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غالب کا ہو خیال کہ پھر میر کا بیاں

دل میں جو بس گیا تو بھلایا نہ جائے گا ۔

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نظریں ملا کے اس نے عجب وعدہ لے لیا

جو ہم سے زندگی میں نبھایا نہ جائے گا ۔

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جو مل رہا ہے ذہن کو فانوس قلب سے

نور ایسا ان چراغوں سے پایا نہ جائے گا ۔

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ہے عکس چشمے شب میں بھی چہرے کا آپ کے

جس کو بری نظر سے بچایا نہ جائے گا ۔

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تاؤمر ہم کو دینا خدا لقم اے حلال

رز کے حرام ہوگا تو کھایا نہ جائے گا ۔

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قربان کر دے جان میں ایسا فقیر ہوں

بیٹھا جو تیرے در پہ، اٹھایا نہ جائے گا ۔

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مومن ہوں سچا اس لئے سر بےگناہ کا

ہاتھوں سے اپنے کاٹ کے لایا نہ جائے گا ۔

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آگے نہ تجھ سے کوئی نکل پائیگا “شکیل”

جب تک زمیں پہ تجھ کو گرایا نہ جائے گا ۔

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